जीवन जीने की पद्धति हिन्दू धर्म

               जीवन जीने की पद्धति हिन्दू धर्म 

हिन्दू धर्म (संस्कृतसनातन धर्म) एकधर्म (या, जीवन पद्धति) है जिसके अनुयायी अधिकांशतः भारत और नेपाल में हैं। इसे विश्व का प्राचीनतम धर्म कहा जाता है। इसे 'वैदिक सनातन वर्णाश्रम धर्म' भी कहते हैं जिसका अर्थ है कि इसकी उत्पत्ति मानव की उत्पत्ति से भी पहले से है।[1] विद्वान लोग हिन्दू धर्म को भारत की विभिन्न संस्कृतियों एवं परम्पराओं का सम्मिश्रण मानते हैं जिसका कोई संस्थापक नहीं है।यह वेदों पर आधारित धर्म है, जो अपने अन्दर कई अलग-अलग उपासना पद्धतियाँ, मत, सम्प्रदाय और दर्शन समेटे हुए है। अनुयायियों की संख्या के आधार पर ये विश्व का तीसरा सबसे बड़ा धर्म है। संख्या के आधार पर इसके अधिकतर उपासक भारत में हैं और प्रतिशत के आधार पर नेपाल में हैं। हालाँकि इसमें कई देवी-देवताओं की पूजा की जाती है, लेकिन वास्तव में यह एकेश्वरवादी धर्म है।[2][3] [4]इसे सनातन धर्म अथवा वैदिक धर्म भी कहते हैं।इण्डोनेशिया में इस धर्म का औपचारिक नाम "हिन्दु आगम" है। हिन्दू केवल एक धर्म या सम्प्रदाय ही नही है अपितु जीवन जीने की एक पद्धति है।[5]


हिंदू ज्योतिष शास्त्र में विद्यमानकाल गणना के अनुसार सृष्टि के आरंभ की तिथि कई करोड़ वर्ष पहले की वर्णित है; संदर्भ हेतु - बहुप्रचलित ग्रेगरी कैलेण्डर के सन् २०१५ मे मार्च माह में प्रारंभ हुआ हिंदू नव वर्ष सृष्टि प्रारंभ से १,९५,५८,८ ५,११६ वाँ वर्ष था। वेदांग ज्योतिषानुसार [6] इस आधार पर हिंदू धर्मावलंबी इस धर्म को उतना ही पुराना मानते हैं। वहीं आधुनिक इतिहासकार हड़प्पा, मेहरगढ़ आदि पुरातात्विक अन्वेषणों के आधार पर इस धर्म का इतिहास मात्र कुछ हज़ार वर्ष पुराना मानते हैं। इन्हें खारिज करने हेतु कई चमत्कारी, सटीक साक्ष्य भी उपलब्ध हैं जो इस धर्म को प्राचीनतम धर्म साबित करते हैं उदाहरणार्थ जर्मनी में १९३९ में मिली नृसिंह की मूर्ति। कार्बन डेटिंग प्रक्रिया से उसकी आयु ४०००० वर्ष हुई। [7]  अतः हम वर्तमान की मतभेदों को छोड़ दे 
तो हम पाएंगे कि किसी न किसी रूप में 

हिन्दू धर्म सर्वधर्म अथवा सर्वग्राह्य रहा है।

टिप्पणियाँ

Unknown ने कहा…
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