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ईश्वर से प्रार्थना कैसे करें?

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ईश्वर से प्रार्थना कैसे करें? असतो मा सद् गमय, तमसो मा ज्योतिर्गमय, मृत्योर्मामृतं गमयेति ।।         हे परमगुरु परमात्मा! आप हम को असत् मार्ग से पृथक कर सन्मार्ग में प्राप्त कीजिये। अविद्या और अंधकार को छुड़ा के विद्यारूप सूर्य को प्राप्त कीजिये और मृत्यु रोग से पृथक करके मोक्ष के आनंदरूप अमृत को प्राप्त कीजिये। अर्थात जिस-जिस दोष व दुर्गुण से परमेश्वर और अपने को भी पृथक मान के परमेश्वर की प्रार्थना की जाती है वह विधि निषेधमुख होने से सगुण, निर्गुण प्रार्थना। जो मनुष्य जिस बात की प्रार्थना करता है उस को वैसा ही वर्तमान करना चाहिये अर्थात जैसे सर्वोत्तम बुद्धि की प्राप्ति के लिये परमेश्वर की प्रार्थना करे उस के लिये जितना अपने से प्रयत्न हो सके उतना किया करे। अर्थात अपने पुरुषार्थ के उपरान्त प्रार्थना करनी योग्य है।     ऐसी प्रार्थना कभी नहीं करनी चाहिये और न परमेश्वर उसे स्वीकार करते हैं कि जैसे हे परमेश्वर! आप मेरे शत्रुओं का नाश, मुझ को सबसे बड़ा, मेरी ही प्रतिष्ठा और मेरे ही आधीन सब हो जायें इत्यादि, क्योकि जब दोनों शत्रु एक दूसरे के न...